बिनती सुनो श्याम हमारी
बहोत निभाई दुनियादारी ,
अब तो शरण में ले लो मुरारी ! ....
पैर ग्रसे है काल ने भारी,
हाथ ने छोड़ी यारी ;
ये गजग्राह का युद्ध है जारी ,
छुड़ाओगे , है , आस तिहारी -----
वेगि ाआओ हे सु- पर्णधारी ! ,
दे दो कालग्रह से मुक्ति हमारी ;
वन्दु तुम्हें हे चक्रधारी ,
" बेला" रो रो चरण पखारि |
बिनती सुनो श्याम हमारी |
३/९/२०२५
६. ०० ए एम
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