Pages

Showing posts with label लोरी. Show all posts
Showing posts with label लोरी. Show all posts

लोरी

  


आ जा मेरे लाल, तुझे पलने में सुलाऊं ,
मैना तोता चिड़िया से साज सजाऊँ --आ जा मेरे 
रुनझुनती घूघरियाँ और रेशम की डोर,
पलने में झूले  लल्ला ,नंदकिशोर ---आ जा मेरे 

फूल से पलना सजाऊँ,मीठी मीठी लोरी गाउँ ,
मुंड आँख हरि !तुझे सपनो में ले जाऊँ ;
खेलो चाँद -तारा के संग परिओं  का रथ बुलाऊँ ,
यही सुख की घड़ियाँ  है ,बचपन पे वारि जाऊं ---आ जा में रे 

भोर भये आते आते ,शबनम से बगियाँ  सजाऊँ ,
"बेला" की मदिर खुशबु से ,तेरा पलना मेहकाऊँ ! --आ जा में रे 

आ जा मेंरे लाल, तुझे पलने में सुलाऊँ 
मैना-तोता चिड़िया से साज सजाऊँ | 
                                 फरुआरी \ २०२२ 

लोरी




   चंदना मंगाओ री ,पलना सजाओ री ,
   आज मेरे लल्ला को लोरी सुनाओ री |

  चन्दन के पलने में रेशम की डोरी ,
  गाजी की गद्दी और सोने की टोकरी 
  लल्ला सोये ,तुम साज बजाओ री |चंदना.......

 लल्ला मेरा जाए चन्दा के देस में ,
 तारों के संग खेले ;खेले बादलों में 
 चांदी के रथ को ,कोई सँवारो री |चंदना....

बेला २३-८-१९८४