झूलो झूलो रे बाल कन्हैया ,माता जसोदा झुलावे |
चंदन का पलना रेशम की डोरी,
माथे मयूर सुहावे ,---झूलो....
गोकुल में आज आनंद छायो है नंदघर कान्हा पधारे ----झूलो....
कोक्लि गावें , वनरावन गहेके , गैया दूध बहावे ----झूलो...
ग्वाला नाचे , गुलाल उड़ावे , गोपी गायें बधाई ,--झूलो......
बगिया महके , भवँरे गूंजे , 'बेला" साख झुलावे। .
झूलो झूलो रे बाल कन्हैया माता जसोदा झुलावे |
१६/८/२०२५
९. ०० ए एम
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