हे मन मोहन, हे मनरंजन,पाहि पाहि हे जग वंदन ,
हे गोपाल, मीरा के गिरिधर,मेरे प्यारे आराधक ,
श्याम श्याम श्यामल सुंदर !
तुम्हीं ने दर्द दिया है, तुम ही दवा दे देंगे |
पूरा जीवन यही एक आस में बिताया है ,
कभी तो प्यार से तुम अपने पास बुला लेंगे !
न की पूजा, न की आरती, न माला फेरी !
बस सोचा था , तुम्हें मन से मना ले|
धूप की खुशबु क्या है, न बता पाएंगे ,
"बेला"के फूल की फॉरમ સે तुम्हें मना लेंगे |
४/८/२०२५
८.५० ए ऍम

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