સાહિત્યના બાગમાં કવિતારૂપી પુષ્પોની ફોરમ પ્રસરાવતા મલયાનિલ સમા સ્વ.કવિ શ્રી પ્રહલાદ પારેખ ને .....
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सोचिये
गुझरती है क्या इस दिल पर
खुद आप ही सोचिये
चल दिए बेहया की तरह ,कैसे
खुद आप ही सोचिए |
देती याद ये पुरवाइया
बीती "बेला"पे कैसी
खुद आप ही सोचिये |
बेला १-१-१९८४
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