Pages

Showing posts with label लुभावन बंसी. Show all posts
Showing posts with label लुभावन बंसी. Show all posts

लुभावन बंसी

 

कान्हा तेरी बंसी मुझको लुभाये ,
तिरछी नजरिया चैन चुराए ;
मधुर मुस्कान मन को भावे ,
चोरी चोरी तेरे पास बुलाये | 

जमुना तट  और बंसी वट पे ,
कदम्ब वृक्ष और पूनम की रातें ;
बरबस मुझको खिंच ले आये ,
देखती रहूं मैं  आँखे बिछाये ,

पीती रहूं शाश्वत सुधारस ये ,
ओर  "बेला" संग डोलूं बिन पलक झपकाए |         
                                   २१/१२/ २०२५ 
                                       ११. १५ ए।  एम्