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सावन का झूला

 


कन्हैया झूले झूला,जरा हौले झोंका दीज्यो।
राधिका झूले झूला, जरा हौले झोंका दीज्यो।

कुंजवन की बगिया में झूला बांध्यो है,
ललितादिक सखियों सुंदर सजायो है;
पवन मंद लहेरायो--जरा हौंले..

सावन की रमझीम की तान लगी है,
नन्हे नन्हे बिन्दु की लडी बनी है;
राधेश्याम मंद मुसकाये-जरा हौंले..

मोर बपैया सूर पुरावे,
गोप गोपियां ढोल बजावे;
वृंदावन खील ऊठा है--जरा हौले..


"बेला,"चमेली, चंपाफूल लाये,
हसी हसी राधा के बाल सजाये:
वनवासी लेते बलैया--जरा हौले
कन्हैया झूले झूला ,जरा हौले झोंका दीज्यो।
7/31/2026

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